Bengali Original Song
কার ভাবে নদে এসে, কাঙাল বেশে,
হরি হয়ে বলছ হরি।
কার ভাবে ধরেছ ভাব, এমন স্বভাব,
তাও তো কিছু বুঝতে নারি॥
কার ভাবে ধরেছ ভাব, এমন স্বভাব,
তাও তো কিছু বুঝতে নারি॥
শ্রীশ্রীরামকৃষ্ণকথামৃত (প্রথম সংস্করণ ১৯৮৬-৮৭, পৃষ্ঠ ১৩৫)
हिन्दी भावार्थ
किसके भाव में नदिये में आकर दीन वेश धारण कर तुम स्वयं हरि होते हुए भी हरिनाम गा रहे हो?
किसका भाव लेकर तुमने यह भाव और ऐसा स्वभाव धारण किया?
कुछ समझ में नहीं आता।”
श्रीरामकृष्ण वचनामृत (द्वितीय संस्करण २०१७, पृष्ठ क्रमांक
१४३)
